It is difficult to know what is right in all cases. - M.B., I.210.29

Dil Aise Na Samajhna

दिल... ऐसे ना समझना के तू है अकेला,
मुश्किल मोड़ सही...
हम रहे थे कभी ना कभी यहाँ पर,
थोड़ी देर और सही,

इस पल आयें हैं, फिर कब जायेंगे?
कहने-सुनने आयें थे; समझ के जायेंगे,

मेरा ना कोई है पता इस जगह पर,
यूं तो है मेरा ये जहां...
लाया क्या मैंने? कम मेरा है यहाँ पर,
शायद हो पेहले से बसता-बसा सब यहाँ,

अबर भी ठेहरा है अभी क़ेहकषां (आकाशगंगा) पर
फैला है देखो यहाँ-वहाँ,
मिल के बरसता ये चला है जहां पर,
इसी की मर्ज़ी है, हो तुम और हम भी यहाँ,

जब नहीं था जहां,
तब से ही कोई यहाँ,
तो दिल! क्यूँ ना मिल के रहें?
वक्त रहे ना सदा,
यूं गुज़र जाएगा...
दिल, एक साये में मिल!
रह जाएँगी यादें, दो बातें,
जब चला जाएगा... चला जाएगा,

सुनने वाले ने कहने वालो को,
वो बातें सुनायी समझने वालो को,
तारें भी कैसे टिम-टिमाते रातों में,
कोई ना तन्हा है वहाँ...
चले ही जाते हैं ये दिल को लुभाके,
इन्ही के जाते ही आये सवेरा यहाँ...

दिल... ऐसे ना समझना के तू है अकेला,
मुश्किल मोड़ नहीं...

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