It is difficult to know what is right in all cases. - M.B., I.210.29

Jheel Pe Jaise


झील पे जैसे नाव चले
आहिस्ता-आहिस्ता,
बादल में ऐसे चाँद छिपे,
कहने को है ये भी चेहरा।

छोड़ आए पीछे हम किसको कहाँ?
उनको खबर है के हम है यहाँ।
आए बहारों में महकाई राह,
फिर मिलने आयेंगे क्या?

बस थोड़ी दूरी ये रस्ता कहे,
रुकने लगे, फिर चल दिए...

जब वो हमे यूं दिलाते हैं वास्ता, वास्ता,
रिश्ते हम ऐसे निभाते है, रात से जैसे कोई सुबह...

अब है नज़र में एक ऐसा समां,
ले कर ही आएंगे तुमको यहाँ,
अन्जान राहो के अन्जान राही,
जाएँ तो जाएँ कहाँ?

तुम हो सलामत, ये दिल यूं कहे,
चाहे मिले, या ना मिले...

दूर से जो बुलाएं तो,
आ जाना, आ जाना,
चाहे सवारी भी ना मिले,
हो सके तो चल के ही आना...






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