It is difficult to know what is right in all cases. - M.B., I.210.29

Mausam

मौसम भी यार है,गुलशन दरबार है,
बरखा का साथ है, कैसी सौगात है !?

अब जायें, कब जायें, कैसे? बोलो!
जिन के साथ दिल लगता है, उनके साथ हो लो !

जाना कहाँ था हमको, कहाँ हम चल दिए?
छोटी-छोटी हसरतों  में हम घुल-मिल गए,
सोच के क्या निकले थे, ये क्या हम कर गए?
जो कहते वो नहीं करते ना, इन में रह गए,

रब ये जाने अब क्या होगा, रस्ता है मुश्किल,
किस चोराहे पे खड़े हैं यार?!...

कितने अरमान है? कैसे अंजाम है?
बरसों का काम है, लम्हों पे नाम है,
देर से आयें, जैसे आयें, बोलो!
जिन के साथ दिल लगता है, उनके साथ हो लो!

मिट्टी का बरतन हो, बरतन में हो सोना,
सोने के बरतन में मिट्टी, ऐसा नहीं होना !
आसमान 'गर छत है, ये धरती बिछोना,
अम्बर को दे साया कौन?! धरती का क्या कोना?!

रब ये जाने कैसा होगा, कहना है मुश्किल !
है उस पार भी घर-बार यार...!

चेहरा हिजाब (purdah) है, गहरा जवाब है,
सच है या ख्वाब है? सब का हिसाब है ।

अब कैसे सबको बतलायें? बोलो!
जिन के साथ दिल लगता है, उनके साथ हो लो !







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