It is difficult to know what is right in all cases. - M.B., I.210.29

Suntey Hi Rehtey Hain

कोई आ रहा, कोई जा रहा,
कोई जा रहा, कोई आ रहा !

सुनते ही रहते है हम तो ज़माने में
ऐसा, कोई वैसा कहीं जा रहा है।
कल जो साथ थे, पल में वो नहीं है !

मिलते ही रहते है हम तो हर मंजिल में
बसती नयी हस्ती से, जहाँ जा रहे है,
कितने तन के! कैसे बन के!

 कैसा ये सफ़र? दिल बड़ा बेसबर,
ये ना जाने, ये ना माने, ये है बेख़बर
कि मैं तो तन्हाई में तन्हा रहके चार समझा हूँ,
दूर रहके पास रहना यार समझा हूँ,

खोए हैं सब कहाँ, ये अकेला जहां !

जितना है, उतने में मैं तो खुश रहता हूँ,
पाना और खोना जानता नहीं;
पा के क्या करें? खो के सब मिले !

गिर के संभलता हूँ, फिर भी कुछ करता हूँ,
देरी और दूरी मैं सोचता नहीं;
देरी ही सही, दूरी तो नहीं !

जैसा भी सफ़र, दिल बड़ा बेसबर,
ये ना जाने, ये ना माने, ये है बेख़बर
कि मैं तो दोस्तों के साथ भी अन्जान रहता हूँ,
रास्तों में हर कहीं पहचान रखता हूँ, 

है यहाँ से वहाँ, ये किसी का जहां...

सुन ले, दिल की सदा, 
दिल की सदा, सुन ले, दिल की सदा,
दिल की सदा, सुन ले, दिल की सदा, सुन ले, 
दिल की सदा, सुन ले, दिल की सदा, सुन ले...


कोई आ रहा, कोई जा रहा,
कोई जा रहा, कोई आ रहा !

अक्सर ये देखा है, यूं कोई ठहरता है
जैसे रुका कोई हार के कहीं;
हारे तो गिरे, जीते तो चले !

बेहतर वो रस्ता है, जिस में दिल बसता है,
ऐसे, किनारे भी मिले है कहीं ?!








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